अपॉइंटमेंट

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हुक्मरान कभी हमसे भी मिला करो,
बगैर अपॉइंटमेंट,
हम भी तो है तेरे फैन|

तुम्हारा चमचमाता चश्मा, 
और घुंघराली अंग्रेजी,
समझ तो आया न मुझे|

मगर लगा कि अपने कमीज़ की तरह,
हो तुम भी अन्दर से सफ़ेद|
लेकिन जब नकाब हटा तो लगा,
तुम हो नए जमाने के अंग्रेज|

लेकिन मिलो कभी ,
बगैर अपॉइंटमेंट हम से भी|
अब वो बिता वक़्त लौट नहीं सकता,
गिला-शिकवा ही कर ले तुमसे|