हुकूमत

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वो यही पढ़ी,
आगे बढ़ी,
लेकिन लगता है उसे भी अब ,
इस जगह से डर|

डर लगता है उसे,
उन सवालों से,
जो राफेल के बारे में है,
मॉब ल्यन्चिंग के बारे में है.
है पेट्रोल की बढती कीमतें,
और शिक्षा के बाजारीकरण के बारे में |

कैमरे के आगे,
दहाड़ती ऐसे,
जैसे खा जाएगी इस जगह को,
जहाँ किसी जमाने में पढ़ी थी वो|

लेकिन किताबों का भय उसे क्यों खा रहा है,
लगता है अब बस वो जुमला सुना करती है|
खैर गलती उसकी नहीं,
उस हुकूमत की है,
जिसका हिस्सा बन गई है वो |