लोकतंत्र का पताका

ये कविता मैंने २०१२ में लिखी थी, लेकिन आज इसे यहाँ फिर से लिख रहा हूँ| तुम्हे एक पताका दूंगा, जिसपर लोकतंत्र लिखा होगा, उसकी खुबशुरती के लिए एक डंडा...

सफ़र

जिंदगी एक सफ़र है, इसमें उम्मीद है, आशाएं है, और मुश्किलें भी |   जो सफ़र पर निकलेगा, उसे यह सब मिलेगा, उम्मीद, आशाएं और मुश्किलें|   हर रोज लाखों, इस सफ़र पर निकलते हैं, कुछ बीच में...

तुम्हारे साथ रहकर- सर्वेश्वर दयाल सक्सेना

मैंने अपनी उम्र के ढलान के साथ यह महसूस करना शुरू किया कि हिंदी भाषी क्षेत्रो से आने वाले गरीब मध्यमवर्गीय परिवार को न तो अच्छी अंग्रेजी...